रायपुर (Raipur News): छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं उस वक्त चरमरा गईं, जब विभिन्न मांगों को लेकर रेजिडेंट और जूनियर डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। हड़ताल के पहले ही दिन सरकारी अस्पतालों की ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हुईं, जिससे दूर-दूर से इलाज कराने पहुंचे मरीज और उनके परिजन परेशान नजर आए। हालांकि, मरीजों की परेशानी को देखते हुए डॉक्टरों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए धरना पंडाल में ही ओपीडी और प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया है।
क्यों शुरू हुई हड़ताल?
डॉक्टरों का आरोप है कि उनकी लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा, स्टाइपेंड (Stipend) बढ़ाने और कार्यस्थल पर बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग पर शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। मजबूरन उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन और समाधान नहीं मिलता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर ही इलाज की व्यवस्था
हड़ताल के दौरान आम जनता को असुविधा न हो, इसके लिए जूनियर डॉक्टरों ने अनोखा तरीका अपनाया है। उन्होंने अस्पताल परिसर के बाहर धरना पंडाल में ही ओपीडी काउंटर लगा दिया है। यहां आने वाले मरीजों का ब्लड प्रेशर, सामान्य जांच और दवाइयों की पर्ची लिखने का काम पंडाल से ही किया जा रहा है, ताकि गंभीर और सामान्य मरीजों को तात्कालिक राहत मिल सके।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
राजधानी के बड़े सरकारी अस्पतालों में रूटीन चेकअप और सर्जरी टालनी पड़ी हैं। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी विभागों में डॉक्टरों के न होने से लंबी कतारें लगी हैं। बहरहाल, मरीज और उनके परिजन सरकार और डॉक्टरों के बीच जल्द किसी समझौते की उम्मीद लगा बैठे हैं ताकि स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पटरी पर लौट सकें।



