रायपुर। रिहायशी मकानों में बिना अनुमति दुकान, ऑफिस, कोचिंग सेंटर, क्लिनिक या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों पर अब नगर निगम सख्त कार्रवाई कर रहा है। राजधानी में ऐसे 12 हजार से ज्यादा आवासीय परिसरों की पहचान की गई है, जहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है।
अदालती निर्देशों के बाद नगर निगम ने आवासीय भवनों और उनमें चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच तेज कर दी है। निगम के अनुसार शहर के 70 वार्डों में बड़ी संख्या में ऐसे मकान हैं, जिनका उपयोग आवासीय स्वीकृति के बावजूद कारोबार के लिए किया जा रहा है।
निगम का कहना है कि इस तरह के इस्तेमाल से संपत्ति कर में भी अंतर आता है। अनुमान के मुताबिक इससे हर साल करीब 4 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। अब दस्तावेजों में दर्ज उपयोग और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा रहा है।
कार्रवाई की शुरुआत भी हो चुकी है। जोन-9 की टीम ने अशोका रतन के सामने आवासीय क्षेत्र में बिना अनुमति संचालित एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स को सील किया है। निगम अधिकारियों के मुताबिक मास्टर प्लान और भूमि विकास नियमों के विपरीत चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
बड़े स्तर की व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियां, जैसे बड़े वेयरहाउस, वर्कशॉप और अधिक भीड़ वाली व्यावसायिक इकाइयां, रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के तहत प्रतिबंधित हैं। बिना अनुमति संचालित छोटी व्यावसायिक गतिविधियां भी निगम की जांच के दायरे में हैं।


