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सड़कों पर अब नहीं दिखेंगे आवारा मवेशी
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्यभर में सड़कों पर बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए एक महीने का विशेष अभियान शुरू किया है।
यह अभियान 5 नवंबर से 5 दिसंबर तक चलेगा, जिसके दौरान स्थानीय निकाय, पुलिस विभाग और पशुपालन विभाग मिलकर सड़कों से बेसहारा मवेशियों को हटाने का काम करेंगे।
सरकार का कहना है कि यह कदम सड़क दुर्घटनाएँ रोकने और शहरों को स्वच्छ एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
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अभियान की जिम्मेदारी शहरी निकायों को
राज्य शासन ने सभी नगर निगमों, नगरपालिकाओं और पंचायत समितियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में घूम रहे गाय, भैंस, बैल और अन्य पशुओं की पहचान कर उन्हें गोशालाओं या सुरक्षित आश्रय स्थलों में भेजें।
इसके अलावा, प्रत्येक निकाय को
- कंट्रोल रूम नंबर जारी करने,
- रात के समय पशु पकड़ने वाली टीमों की व्यवस्था,
- और स्थानीय पुलिस की मदद से यातायात प्रभावित न होने की सुनिश्चितता का आदेश दिया गया है।
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आवारा पशु बन रहे थे खतरा
हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ के कई जिलों — रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा और राजनांदगांव — में आवारा पशुओं की वजह से सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ी हैं।
सिर्फ रायपुर जिले में पिछले तीन महीनों में 25 से अधिक सड़क हादसे आवारा पशुओं से जुड़े पाए गए हैं।
राज्य सरकार ने माना कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या शहरी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बन सकती है।
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अधिकारियों का बयान
रायपुर नगर निगम आयुक्त डॉ. विपिन बिहारी ने बताया —
“अभियान का मकसद किसी पशु को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना है। हर गोशाला को अतिरिक्त चारा और पानी की व्यवस्था का निर्देश दिया गया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक अगर कहीं भी सड़क पर आवारा पशु देखें, तो हेल्पलाइन नंबर 1100 या नगर निगम कंट्रोल रूम में सूचना दे सकते हैं।
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जनता की भूमिका भी अहम
सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने पालतू पशुओं को सड़कों पर न छोड़ें।
अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा करता है, तो उस पर ₹500 से ₹2000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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अभियान के मुख्य उद्देश्य:
- सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना
- शहरों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाना
- बेसहारा मवेशियों को गोशालाओं तक पहुँचाना
- पशु कल्याण की दिशा में स्थायी समाधान