रायपुर। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) रायपुर ने 30 साल पुराने 1.86 करोड़ रुपये के गृह निर्माण ऋण गबन मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में 15 हजार पन्नों का चालान पेश किया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 186 सदस्यों के नाम पर 1-1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर राशि का गबन किया गया था।
जांच में सामने आया कि जिन स्थानों पर मकान निर्माण दिखाया गया था, वहां एक भी मकान नहीं मिला। कई लाभार्थी भी दिए गए पते पर मौजूद नहीं पाए गए। मामले में तत्कालीन समिति अध्यक्ष, आवास पर्यवेक्षक और प्रबंधक पर फर्जी प्रमाण-पत्र जारी कर ऋण स्वीकृत कराने का आरोप है।
EOW के अनुसार, 1995-98 के बीच हुए इस घोटाले में लिया गया 1.86 करोड़ रुपये का ऋण ब्याज सहित बढ़कर 104 करोड़ रुपये का डूबत कर्ज बन चुका है। एजेंसी ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया है।


