रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के तिल्दा क्षेत्र में स्थित 117 साल पुराने पेंड्रावन जलाशय के अस्तित्व पर संकट गहराता नजर आ रहा है। जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी को लाइम स्टोन (चूना पत्थर) खनन के लिए दोबारा अनुमति मिलने के बाद स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में नाराजगी है। पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति ने इस फैसले का विरोध करते हुए खनन की अनुमति तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
समिति के मुताबिक, ग्राम बंगोली स्थित यह जलाशय क्षेत्र के 11 गांवों के करीब 3,440 किसानों की 2,440 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा जलाशय का पानी मछली पालन, निस्तारी और भूजल स्तर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
किसान संघर्ष समिति का आरोप है कि कंपनी की करीब 1,722 एकड़ में प्रस्तावित खनन परियोजना से जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र और जलभराव क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसानों को आशंका है कि ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियों से जलाशय की संरचना को भी नुकसान पहुंच सकता है।
2017 में भी रद्द हो चुकी है अनुमति
इससे पहले वर्ष 2017 में किसानों के विरोध के बाद खनन के लिए जारी NOC निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद अल्ट्राटेक कंपनी ने हाईकोर्ट का रुख किया। 25 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने NOC निरस्तीकरण का आदेश रद्द करते हुए तकनीकी समिति की समीक्षा के बाद नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
अब 23 जुलाई 2025 को जल संसाधन विभाग की ओर से दोबारा NOC जारी किए जाने के बाद विवाद फिर गहरा गया है। समिति ने शासन से पूरी खनन परियोजना रद्द करने की मांग की है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि जलाशय की सुरक्षा और किसानों की आजीविका से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

